हम एक शैतानी ताकत के अधीन हैं: मोदी पर मधु किश्वर

(दो दिनों पहले एक सोशल मीडिया प्लेटफार्म को दिए एक इंटरव्यू में बीजेपी नेता और पूर्व राज्यसभा सदस्य सुब्रमण्यम स्वामी ने पीएम मोदी और उनसे जुड़ी कुछ महिला नेताओं के बारे में सनसनीखेज खुलासे किए हैं। जिसमें उन्होंने कहा कि वह कई ऐसी बीजेपी महिला सांसदों को जानते हैं जिन्हें मोदी के साथ हमबिस्तर होने के बाद टिकट मिला है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि एक को तो मंत्री तक के पद से नवाजा गया। लेकिन उन्होंने इनमें से किसी का भी नाम लेना उचित नहीं बताया। इस खुलासे पर एक दौर में मोदी की भक्त रहीं महिला एक्टिविस्ट मधु किश्वर ने प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए न केवल उसकी पुष्टि की है बल्कि पीएम मोदी के महिलाओं से रिश्तों से जुड़ी कुछ और कहानियां पेश कर दीं। आइये पढ़ते हैं मधु किश्वर की पूरी पोस्ट-संपादक)

यही कारण है कि मैंने मई, 2014 में सत्ता संभालने के समय से ही मोदी से सुरक्षित दूरी बनाए रखी। मैं उन्हें अपनी लिखी किताब की प्रति देने भी नहीं गयी। बस उनके पसंदीदा नौकरशाह भारत लाल के माध्यम से एक बिना हस्ताक्षर वाली प्रति भिजवा दी।

मोदी द्वारा नज़दीकी के कारण सांसद और मंत्री बनाई गई महिलाओं के नाम संघी सत्ता नेटवर्क के भीतर शुरू से ही धीमी आवाज़ में लेकिन स्पष्ट रूप से फुसफुसाए जा रहे थे। यही वजह थी कि मैंने बहुत पहले ही सावधानी बरतनी शुरू कर दी।

हरदीप पुरी जैसे लोगों के नाम भी, जिन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए उन्हें विशेष सेवाएं दी थीं, तब ही दबे स्वर में चर्चा में आने लगे थे जब हरदीप और जयशंकर को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया।

2014 में जब मैं व्याख्यान देने अमेरिका गयी, तो वहां भी उनकी अय्याशी की कहानियां घूम रही थीं।

12वीं पास स्मृति ईरानी को शिक्षा मंत्री बनाए जाने से, जो स्कैंडल तब तक जनता से छिपे हुए थे, उन्हें भी विश्वसनीयता मिलने लगी।

मानसी सोनी से जुड़ा कांड पहले ही सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका था।

मोदी के करीबी किसी व्यक्ति ने मुझे सुप्रीम कोर्ट में जमा किए गए दस्तावेजों का पूरा सेट दिया, जो एक जेल में बंद IAS अधिकारी द्वारा प्रस्तुत किए गए थे, जो सोनी के साथ संबंधों में लिप्त था।

इसके अलावा, गुजरात के लोगों ने, जिनमें कुछ मोदी के करीबी भी शामिल थे, मुझे उनके मुख्यमंत्री रहते हुए महिलाओं के साथ उनके कथित अनुचित संबंधों की घिनौनी कहानियां बताईं।

और इससे पहले, जब वे प्रचारक और भाजपा के पदाधिकारी थे, तब की भी ऐसी बातें सामने आईं।

इन कहानियों को सुनकर मैं उनकी मौजूदगी से इतना विरक्त हो गयी कि मैंने उन कार्यक्रमों में जाना भी बंद कर दिया, जिनमें मोदी के आने की संभावना होती थी, यहां तक कि विवाह समारोहों में भी नहीं गयी।

इन भयानक विवरणों से मैं इतना आहत हुई कि 2014 में मैं गहरे अवसाद में चली गयी, जिसने मेरे स्वास्थ्य पर गहरा असर डाला। 2015 में मैं 21 दिनों के लिए कोयंबटूर के एक आयुर्वेदिक उपचार केंद्र गयी, ताकि इन आघातों से उबर सकूं।

मुझे याद है, जब मैंने इन रिपोर्टों से उपजे अपने दुख को एक वरिष्ठ RSS बुद्धिजीवी के साथ साझा किया, तो उन्होंने इसे यह कहकर टाल दिया, “तुम इतनी हैरान क्यों हो? उसकी निजी जिंदगी से हमें क्या फर्क पड़ता है?”

#pornpeddler अमित मालवीय को भाजपा के सोशल मीडिया प्रभारी के रूप में नियुक्त करना भी भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की प्रवृत्तियों का एक और प्रमाण था।

यदि उन्होंने अन्य क्षेत्रों में अच्छा काम किया होता, तो मैं उनके कथित यौन आचरण को नजरअंदाज कर सकती थी।

लेकिन उनके द्वारा कथित रूप से विनाशकारी वैक्सीन का आक्रामक प्रचार, हिंदू समाज को दबाने और हिंदू धर्म को बदनाम करने के प्रयास, भीमटा और मीमटा समूहों को संरक्षण देकर हिंदुओं पर हमले करवाना, वैश्विक शक्तियों के प्रति उनका कथित दासवत व्यवहार, कठुआ कांड के दौरान हिंदुओं के खिलाफ उनकी कथित कार्रवाई (जिसका विवरण मेरी किताब The Girl From Kathua, A Sacrificial Victim of GhazwaE Hind में है) और कई अन्य कारणों ने मुझे उनके पहले कार्यकाल में ही यह महसूस करा दिया कि हम एक शैतानी शासक के अधीन हैं, जो भारत को नुकसान पहुंचाने और हिंदुओं को कमजोर करने के लिए सत्ता में लाया गया है।

मोदी के व्यक्तित्व संबंधी विकारों ने मुझे यह विश्वास दिलाया है कि हमें अपने नेताओं के यौन आचरण पर कहीं अधिक ध्यान देना चाहिए।

जो लोग इस मोर्चे पर कमजोर होते हैं, वे आर्थिक रूप से भ्रष्ट लोगों की तुलना में भारत के दुश्मनों द्वारा ब्लैकमेल का शिकार जल्दी बनते हैं।

मैं जल्द ही यह प्रमाण प्रस्तुत करूंगी कि उन्हें पहले दिन से ही कैसे ब्लैकमेल किया जा रहा है।

इसी वजह से उनके 56 इंच के सीने वाले भद्दे दावे सामने आते हैं।

(जनचौक ब्यूरो की रिपोर्ट।)

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